
एक छोटे से गाँव में आरव नाम का लड़का रहता था। गाँव के ज़्यादातर लोग मानते थे कि बड़ा काम सिर्फ बड़े शहरों में रहने वाले लोग ही कर सकते हैं। आरव भी यही सोचता था, लेकिन उसके दिल में कुछ नया करने की आग थी।
आरव के पास न तो ज़्यादा पैसे थे, न ही कोई बड़ा सहारा। लोग अकसर उससे कहते,
“तू क्या कर लेगा? हम जैसे लोग बस किस्मत के सहारे ही जीते हैं।”
शुरुआत में ये बातें उसे तोड़ देती थीं। लेकिन एक दिन उसने अपने दादा को मिट्टी का छोटा सा दीया बनाते देखा। दादा ने दीया जलाया और कहा,
“बेटा, दीया छोटा है, पर अंधेरा दूर करने की ताकत रखता है।”
यही बात आरव के दिल में बैठ गई।
उसने तय किया कि वह खुद को किसी से कम नहीं समझेगा। उसने रोज़ थोड़ा-थोड़ा सीखना शुरू किया—कभी किताबों से, कभी मोबाइल से, कभी अपने अनुभवों से। लोग हँसते रहे, मज़ाक उड़ाते रहे, लेकिन आरव रुका नहीं।
धीरे-धीरे उसके काम में नयापन आने लगा। जो लोग पहले उसे नज़रअंदाज़ करते थे, वही अब उससे सीखने आने लगे। कुछ सालों में आरव वही कर दिखाया, जो उसने कभी सिर्फ सपने में सोचा था।
एक दिन गाँव में सभा हुई। आरव ने बस इतना कहा:
“मैं कोई खास नहीं हूँ। बस मैंने खुद को कम समझना छोड़ दिया।”
सीख:
हालात नहीं, सोच इंसान को छोटा बनाती है।
कुछ नया करने की शुरुआत बाहर से नहीं, अपने विश्वास से होती है।
अगर आप खुद पर भरोसा कर लें, तो दुनिया को भी आप पर भरोसा करना पड़ेगा।
👉 याद रखिए: आप भी एक दीये की तरह हैं—छोटे सही, लेकिन अंधेरा दूर करने की पूरी ताकत रखते हैं।
